Tuesday, 25 October 2011

वह निशानी कहाँ गयी !!!

आँखों ने जो कही थी , वह कहानी कहाँ गयी ?
लब ने जो लब को दी थी, वो निशानी कहाँ गयी ?
वो लोच वो निखार वो अल्हड मिजाजियाँ,
अंग्दयियो की की जादू बयानी कहाँ गयी?
मैं जिसकी खुशबुओं में नहाता था रात दिन,
उसके चमन से रात-रानी कहाँ गयी?
सूखा हुआ गुलाब है जिसकी पनाह में,
वो कीमती किताब पुरानी कहाँ गयी ?
अरमान सरफ़रोश के सब हो गए धुआं,
नाज़े बदन थी जो वो जवानी कहाँ गयी ?
चाहत के जिस बसंत में चहका था जो "राजीव",
अब मैं किस्से पूंछू रुत वो सुहानी कहाँ गयी ?
                                                       - राजीव "रजत"