Wednesday, 28 March 2012

A Short Note of The Innermost Love

This short note was given to me by my love at time when i visited her home in the evening one day....
I still feel and miss that pure love but not able to understand what made her forget everything and move on ....was that money really ? or something else...still confused, totally confused !!!


Friday, 24 February 2012

मत इंतज़ार कराओ हमे इतना !!!


मत इंतज़ार कराओ हमे इतना
कि वक़्त के फैसले पर अफ़सोस हो जाये
क्या पता कल तुम लौटकर आओ
और हम खामोश हो जाएँ
दूरियों से फर्क पड़ता नहीं
बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है
दोस्ती तो कुछ आप जैसो से है
वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती है
दिल से खेलना हमे आता नहीं
इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए
शायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हें
इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए
मना लूँगा आपको रुठकर तो देखो,
जोड़ लूँगा आपको टूटकर तो देखो।
नादाँ हूँ पर इतना भी नहीं ,
थाम लूँगा आपको छूट कर तो देखो।
लोग मोहब्बत को खुदा का नाम देते है,
कोई करता है तो इल्जाम देते है।
कहते है पत्थर दिल रोया नही करते,
और पत्थर के रोने को झरने का नाम देते है।
भीगी आँखों से मुस्कराने में मज़ा और है,
हसते हँसते पलके भीगने में मज़ा और है,
बात कहके तो कोई भी समझलेता है,
पर खामोशी कोई समझे तो मज़ा और है…!
मुस्कराना ही ख़ुशी नहीं होती,
उम्र बिताना ही ज़िन्दगी नहीं होती,
दोस्त को रोज याद करना पड़ता है,
क्योकि दोस्त कहना ही दोस्ती नहीं होती....!!!!
                                    :(

Sunday, 19 February 2012

एक लब्ज मैं क्या तरीफ करूं आपकी !!!

एक लब्ज मैं क्या तरीफ करूं आपकी आप लब्जों मैं कैसे समां पाओगे ,
बस इतना जान लो की जब लोग दोस्ती के बारे मैं पूछेंगे,
तो मेरी आँखों से सिर्फ तुम नजर आओगे !

वादियों से चाँद निकल आया है,
फीजाओं मैं नया रंग छाया हैं ,
आप हो की खामोस बेठे हैं ,
अब तो मुस्कराओ क्यूंकि एक बार फिर हमारा स्क्रैप आया है.

कल फुर्सत न मिली तो क्या होगा
इतनी मोहलत न होगी तो क्या होगा ,
रोज आपके स्क्रैप का इंतज़ार करता हूँ
कल आँखें न रहे तो क्या होगा.

फूल से किसी ने पूछा तुने खुशबू दी तुझे क्या मिला
फूल ने कहा लेना और देना तो व्यापार है
जो दे कर कुछ न मांगे वो प्यार है.

किसी एक से करो प्यार इतना की किसी और से प्यार करने की गुंजाइश न रहे,
वो मुस्करा के देखे एक बार
तो जिंदगी से फिर कोई ख्वाहिश ना रहे

Tuesday, 24 January 2012

सतह पर जमा प्यार !!!

समय की सिलवटों में
मेरे प्यार
की सीवन नहीं उधड़ी है
समय-समय पर
मिल कर हम ने
उसकी सिलाई पक्‍की की है।

फर्क बस इतना है कि
उसे जताने
या दिखाने की
छत की मुंडेर से चिल्‍लाने की
अब जरूरत नहीं।

न दरकार है,
पुरानी यादों की,
या पूरे-अधूरे वादों की,
अब दिखता नहीं
सिर्फ महसूस होता है
सतह पर जमा प्यार
अब गहरे पैठ गया है!