Sunday, 19 February 2012

एक लब्ज मैं क्या तरीफ करूं आपकी !!!

एक लब्ज मैं क्या तरीफ करूं आपकी आप लब्जों मैं कैसे समां पाओगे ,
बस इतना जान लो की जब लोग दोस्ती के बारे मैं पूछेंगे,
तो मेरी आँखों से सिर्फ तुम नजर आओगे !

वादियों से चाँद निकल आया है,
फीजाओं मैं नया रंग छाया हैं ,
आप हो की खामोस बेठे हैं ,
अब तो मुस्कराओ क्यूंकि एक बार फिर हमारा स्क्रैप आया है.

कल फुर्सत न मिली तो क्या होगा
इतनी मोहलत न होगी तो क्या होगा ,
रोज आपके स्क्रैप का इंतज़ार करता हूँ
कल आँखें न रहे तो क्या होगा.

फूल से किसी ने पूछा तुने खुशबू दी तुझे क्या मिला
फूल ने कहा लेना और देना तो व्यापार है
जो दे कर कुछ न मांगे वो प्यार है.

किसी एक से करो प्यार इतना की किसी और से प्यार करने की गुंजाइश न रहे,
वो मुस्करा के देखे एक बार
तो जिंदगी से फिर कोई ख्वाहिश ना रहे

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