Tuesday, 24 January 2012

सतह पर जमा प्यार !!!

समय की सिलवटों में
मेरे प्यार
की सीवन नहीं उधड़ी है
समय-समय पर
मिल कर हम ने
उसकी सिलाई पक्‍की की है।

फर्क बस इतना है कि
उसे जताने
या दिखाने की
छत की मुंडेर से चिल्‍लाने की
अब जरूरत नहीं।

न दरकार है,
पुरानी यादों की,
या पूरे-अधूरे वादों की,
अब दिखता नहीं
सिर्फ महसूस होता है
सतह पर जमा प्यार
अब गहरे पैठ गया है!

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